अमलतास वो पेड़ हैं जिसके नीचेबैठकर कालिदास ने "अभिज्ञान शाकुंतलम "की रचना की थी | इस अमलतास के नीचे ही जीवन के छब्बीस बसंत गुजरे हैं ,या यूँ कहू की जीवन ने आँखे इसी अमलतास के नीचे खोली हैं |